फासले
कुछ चाहे
कुछ अनचाहे
धीरे धीरे बढ़ते हुवे
तुम्हारे मेरे दरमियान
और मेरी सांसो के बिच भी
कई ब़ार मै तय नहीं कर पाता हू
की सांस लेना ज्यादा मुश्किल है
या फिर तुमसे मिलने की कोशिश करना
वैसे एक बात तो तय है
अगर मै तुमसे नहीं मिल सकता तो
मुझे सांस लेने की भी जरुरत नहीं है
पता नहीं अब कितना वक़्त बचा है
सोचता हु सांस लेने से बेहतर है
एक ब़ार फिर तुमसे मिलने की कोशिश ही कर लू
इस उम्मीद के साथ की शायद
आंखरी सांस तुम्हारी बाँहों में ले लू
और सारे फासले खत्म हो जाये
Monday, April 4, 2011
वादे
हर ब़ार एक नयी उम्मीद लेकर आता हु तेरे शहर में
की शायद इस ब़ार तो तुझसे मुलाकात हो जाये
और फिर हमेशा की तरह मायूस हो के चला जाता हु
अगली ब़ार मिलने का सपना देखते हुवे
जानता हु फिर भी हर ब़ार उम्मीद लगाता हु
और हर ब़ार वो ही भूल करता हु
तेरे वादे पे ऐतबार करने की
की शायद इस ब़ार तो तुझसे मुलाकात हो जाये
और फिर हमेशा की तरह मायूस हो के चला जाता हु
अगली ब़ार मिलने का सपना देखते हुवे
जानता हु फिर भी हर ब़ार उम्मीद लगाता हु
और हर ब़ार वो ही भूल करता हु
तेरे वादे पे ऐतबार करने की
Sunday, April 3, 2011
मैंने देखा था एक ख्वाब
मैंने देखा था एक ख्वाब
झील सी आँखों का
खनकती हंसी का
शहद सी बोली का
अब भी रखा है उसे सहेज के
अपने तकिये के निचे
मन के किसी कोने में
यादों की चौकट में
मेरी सांसो में
मेरी धड़कन में
तुम्हारी हंसी में
मेरे आँसुओ में
देखता हु उसे निकाल के
जब भी होता हु अकेला
या फिर
जब होना चाहता हु अकेला,
यादों में तुम्हारी खोने के लिए
झील सी आँखों का
खनकती हंसी का
शहद सी बोली का
अब भी रखा है उसे सहेज के
अपने तकिये के निचे
मन के किसी कोने में
यादों की चौकट में
मेरी सांसो में
मेरी धड़कन में
तुम्हारी हंसी में
मेरे आँसुओ में
देखता हु उसे निकाल के
जब भी होता हु अकेला
या फिर
जब होना चाहता हु अकेला,
यादों में तुम्हारी खोने के लिए
Wednesday, March 9, 2011
मैंने कई बार चाहा है
मैंने कई बार चाहा है
खुद ही खुद को खत्म करना
और कोशिश भी की है
नहीं मै आत्महत्या की बात नहीं कर रहा हु
जानता हु वो बुजदिलो का काम है
मै तो बात कर रहा हु
शायद कही उससे आगे
जब जरुरत होती है
अपने विचारो का गला घोटने की
अपनी अभिव्यक्ति को मिटाने की
जानता हु की वो सबसे बड़ी हार है
शायद वो सब करना भी मेरी मज़बूरी थी
या अब भी है
या फिर समझोता था
कुछ खुद से और कुछ ज़माने से
कुछ सांसे उधार लेने का
ताकि जिंदगी चला सकू
अगली लढाई के लिए
जो मै लढ़ रहा हु
ताकि मेरी अगली नस्ल
साँस ले सके
और उन्हें जरुरत न पड़े
लढने की
अपने आप से
और इस समाज से
छोटी छोटी बातों के लिए
और गिरना न पड़े
अपनी ही नजरो में
जैसे मै गिरा हु
कई बार
फिर से उठने के लिए
खुद ही खुद को खत्म करना
और कोशिश भी की है
नहीं मै आत्महत्या की बात नहीं कर रहा हु
जानता हु वो बुजदिलो का काम है
मै तो बात कर रहा हु
शायद कही उससे आगे
जब जरुरत होती है
अपने विचारो का गला घोटने की
अपनी अभिव्यक्ति को मिटाने की
जानता हु की वो सबसे बड़ी हार है
शायद वो सब करना भी मेरी मज़बूरी थी
या अब भी है
या फिर समझोता था
कुछ खुद से और कुछ ज़माने से
कुछ सांसे उधार लेने का
ताकि जिंदगी चला सकू
अगली लढाई के लिए
जो मै लढ़ रहा हु
ताकि मेरी अगली नस्ल
साँस ले सके
और उन्हें जरुरत न पड़े
लढने की
अपने आप से
और इस समाज से
छोटी छोटी बातों के लिए
और गिरना न पड़े
अपनी ही नजरो में
जैसे मै गिरा हु
कई बार
फिर से उठने के लिए
Tuesday, March 1, 2011
परीक्षा
जब अक्सर चलने लगती है धुल भरी आंधिया
और गिरने लगते है पेड़ो से अनवरत पत्ते,
भरी दोपहरी में आती है
पत्तो के पीछे से कोयल की आवाज,
या फिर २ पंक्तिया पढने के बाद ही
अक्षर होने लगते है धुंधले !
जब साइकिल के चक्के करने लगते है
दोस्ती सड़क के डामर से,
और आते जाते मन बहका जाती है
पकी इमली की खुशबु ,
कभी सिर्फ सुनाई देती है
कुल्फी वाले के घंटी की आवाज
या फिर...........
पानी पीते ही लगने लगती है प्यास
तो ऐसा लगता है
मानो पेपर बिघड गया हो
और गिरने लगते है पेड़ो से अनवरत पत्ते,
भरी दोपहरी में आती है
पत्तो के पीछे से कोयल की आवाज,
या फिर २ पंक्तिया पढने के बाद ही
अक्षर होने लगते है धुंधले !
जब साइकिल के चक्के करने लगते है
दोस्ती सड़क के डामर से,
और आते जाते मन बहका जाती है
पकी इमली की खुशबु ,
कभी सिर्फ सुनाई देती है
कुल्फी वाले के घंटी की आवाज
या फिर...........
पानी पीते ही लगने लगती है प्यास
तो ऐसा लगता है
मानो पेपर बिघड गया हो
Subscribe to:
Posts (Atom)