वो एक बहती हुई नदी
बिलकुल मेरी जिंदगी के मानिंद
वो एक बहती हुई नदी
अविरत - अविचल अपने गंतव्य की और बढती हुई
जैसे किसी से मिलने की आस में
दौड़ रही है वो प्यासी नदी
लहराती बलखाती अपने ही मस्ती में बढती हुई
मानो सूरज का आना और जाना उसने देखा ना हो
कभी एकदम शांत और सोच में डूबी हुई
तो कभी विकराल रूप धारण करके फुफकारती हुई
कभी ख़ुशी में आ के सबके साथ अठखेलिया करती
और कभी गुस्से में उफन के सबको मिटाने को दौड़ती
कभी सबको अपने आगोश में लेती
तो कभी अपने आप में सिमट के ख़ामोशी से बहती हुई
वो एक बहती हुई नदी
बिलकुल मेरी जिंदगी के मानिंद
दोनों किनारों के बिच में बहती हुई
जैसे दोहरी जिंदगी जी रही हो
बिलकुल मेरी जिंदगी के मानिंद
अपने आप में उलझी हुई
थोड़ी सी खोई हुई
कुछ अलसाई सी
थोड़ी सी सोई हुई
कभी अचानक जागती सी
थोड़ी बोखलाई सी
पर एकदम अकेली सी
वो एक बहती हुई नदी
बिलकुल मेरी जिंदगी के मानिंद
Sunday, May 8, 2011
Tuesday, May 3, 2011
क़र्ज़
एक कोशिश है तेरी यादों का क़र्ज़ मेरे आंसुओ से चुकाने की
सिर्फ एक कोशिश ही है कामयाबी की उम्मीद नहीं
वैसे भी मुझे पता है मै तेरा क़र्ज़ ना उतार पाउँगा
और ये भी चाहता हु की ताउम्र तेरा कर्जदार रहू
तेरी हंसी तेरी आँखें उनकी यादें बड़ी अनमोल है
जिंदगी भी लुटा दू एक कतरा ना चुका पाउँगा
मेरे इंतजार को रश्क है उस मल्लाह से
जो किनारे पे करता है इंतजार लहरों का
तकलीफ मुझे तेरे इंतजार से नहीं
डरता हु कही सांस दगा ना दे जाये
सिर्फ एक तेरा हक है मेरी जिंदगी पे
या तो इसे अपना ले
या फिर
कर दे रिहा इसे अपनी कैद से
सिर्फ एक कोशिश ही है कामयाबी की उम्मीद नहीं
वैसे भी मुझे पता है मै तेरा क़र्ज़ ना उतार पाउँगा
और ये भी चाहता हु की ताउम्र तेरा कर्जदार रहू
तेरी हंसी तेरी आँखें उनकी यादें बड़ी अनमोल है
जिंदगी भी लुटा दू एक कतरा ना चुका पाउँगा
मेरे इंतजार को रश्क है उस मल्लाह से
जो किनारे पे करता है इंतजार लहरों का
तकलीफ मुझे तेरे इंतजार से नहीं
डरता हु कही सांस दगा ना दे जाये
सिर्फ एक तेरा हक है मेरी जिंदगी पे
या तो इसे अपना ले
या फिर
कर दे रिहा इसे अपनी कैद से
Monday, April 25, 2011
खानाबदोश
मानो तो ये जिंदगी मस्त है न मानो तो पस्त है
हर कदम पे तूफान है तो उसे पार करने की ताकत भी है
हर अगले मोड़ पे धोका है तो
कभी कभी ठंडी हवा का झोका भी है
कभी फाकों में भी मस्ती का आलम है
तो कभी भरे पेट भी किसी बात का गम है
कभी यारों का साथ है
और कभी दुश्मनों की बारात है
वैसे तो ये जिंदगी का दस्तूर है
पर शायद ये बेवजह ही मगरूर है
खैर जिंदगी तो जिंदगी है
इसपे मरना मेरी बंदगी है
शायद इसकी बेरुखी मेरी जान लेगी
या फिर
इसकी चाहत में मै दम तोडूंगा
हर कदम पे तूफान है तो उसे पार करने की ताकत भी है
हर अगले मोड़ पे धोका है तो
कभी कभी ठंडी हवा का झोका भी है
कभी फाकों में भी मस्ती का आलम है
तो कभी भरे पेट भी किसी बात का गम है
कभी यारों का साथ है
और कभी दुश्मनों की बारात है
वैसे तो ये जिंदगी का दस्तूर है
पर शायद ये बेवजह ही मगरूर है
खैर जिंदगी तो जिंदगी है
इसपे मरना मेरी बंदगी है
शायद इसकी बेरुखी मेरी जान लेगी
या फिर
इसकी चाहत में मै दम तोडूंगा
Sunday, April 17, 2011
रोटी
बदहवासी की हालत में
बेतहाशा भागता हुवा वो
कभी आगे तो कभी पीछे देखता हुवा
हर बार लगने वाली ठोकरों से खुद को संभालता हुवा
और पीछे भागने वाली भीड़ से खुद को बचाता हुवा
भीड़ कभी गालिया निकालती तो कभी
पत्थर उछालती
अपने उन्माद को और बढाती हुई
धीरे धीरे भीड़ नजदीक आने लगी
अब उसका भी दम फूलने लगा
जल्दी ही भीड़ ने उसको दबोच लिया
वो निचे था और जनता उसके ऊपर
बड़ी मुश्किल से जतन की हुई
हाथ की रोटी
मिटटी में मिल चुकी थी
और साथ ही में
मिल गयी थी मिटटी में
उसकी भूक
और
आँख से गिरते हुवे आंसू
बेतहाशा भागता हुवा वो
कभी आगे तो कभी पीछे देखता हुवा
हर बार लगने वाली ठोकरों से खुद को संभालता हुवा
और पीछे भागने वाली भीड़ से खुद को बचाता हुवा
भीड़ कभी गालिया निकालती तो कभी
पत्थर उछालती
अपने उन्माद को और बढाती हुई
धीरे धीरे भीड़ नजदीक आने लगी
अब उसका भी दम फूलने लगा
जल्दी ही भीड़ ने उसको दबोच लिया
वो निचे था और जनता उसके ऊपर
बड़ी मुश्किल से जतन की हुई
हाथ की रोटी
मिटटी में मिल चुकी थी
और साथ ही में
मिल गयी थी मिटटी में
उसकी भूक
और
आँख से गिरते हुवे आंसू
Tuesday, April 12, 2011
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
बड़ी अजीब है मेरी जिंदगी
कभी हसाती कभी रुलाती
कभी खुद रूठती
तो कभी मुझे सताती
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
कभी सूरज में तपती
तो कभी बारिश में भीगती
कभी शहद से भी मीठी तो
कभी समंदर से भी नमकीन मेरी जिंदगी
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
कभी बेतहाशा दौड़ती
और कभी मुझे दौड़ाती
अपने नखरो से मुझे
लुभाती ये जिंदगी
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
कभी हसाती कभी रुलाती
कभी खुद रूठती
तो कभी मुझे सताती
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
कभी सूरज में तपती
तो कभी बारिश में भीगती
कभी शहद से भी मीठी तो
कभी समंदर से भी नमकीन मेरी जिंदगी
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
कभी बेतहाशा दौड़ती
और कभी मुझे दौड़ाती
अपने नखरो से मुझे
लुभाती ये जिंदगी
काफी जिद्दी सी मेरी जिंदगी
Sunday, April 10, 2011
और फिर खुद को खत्म कर लूँगा
फिर एक दिन तमाम हुवा
और तेरी चाहत को पाने में
मै फिर नाकाम हुवा
रोज की तरह
मेरी आरजू तेरी
बेरुखी की वजह से
तड़पती रही
रोज की तरह
सूरज का आना और
चाँद के आने तक रुकना
ऐसा लगता है
मानो मेरे अकेलेपन का
अहसास उसे भी हो चुका है
तुझे शायद लगे ना लगे
पर मुझे पता है की
ये पल जैसे
तेजाब की बुँदे
बन कर मेरे
वजूद को जला रहे है
पर मै हर रोज आऊंगा
अपने आप को जलाऊंगा
कोई तो दिन होगा जब
जब तुझे मेरी याद आएगी
मेरे आंसू
मेरी मुहोब्बत
तुझे जलाएगी
और अगर तू समझ ना पाई
तो मै समझ लूँगा
सिर्फ और सिर्फ एक ब़ार
तुझे याद करूँगा
और फिर खुद को
खत्म कर लूँगा
और तेरी चाहत को पाने में
मै फिर नाकाम हुवा
रोज की तरह
मेरी आरजू तेरी
बेरुखी की वजह से
तड़पती रही
रोज की तरह
सूरज का आना और
चाँद के आने तक रुकना
ऐसा लगता है
मानो मेरे अकेलेपन का
अहसास उसे भी हो चुका है
तुझे शायद लगे ना लगे
पर मुझे पता है की
ये पल जैसे
तेजाब की बुँदे
बन कर मेरे
वजूद को जला रहे है
पर मै हर रोज आऊंगा
अपने आप को जलाऊंगा
कोई तो दिन होगा जब
जब तुझे मेरी याद आएगी
मेरे आंसू
मेरी मुहोब्बत
तुझे जलाएगी
और अगर तू समझ ना पाई
तो मै समझ लूँगा
सिर्फ और सिर्फ एक ब़ार
तुझे याद करूँगा
और फिर खुद को
खत्म कर लूँगा
Friday, April 8, 2011
जैसा की अक्सर होता है
जैसा की अक्सर होता है
कल भी पूरी रात मै सो न सका
कोशिश करता रहा
सपने देखने की
पर उसके लिए
नींद का आना भी तो जरुरी है ना
और वो तो जैसे मुझसे नाराज हो गयी थी
बिलकुल तुम्हारी तरह
मेरा उसको मनाने का भी कोई फायदा नहीं हो रहा था
वो भी रूठी हुवी थी
बिलकुल तुम्हारी तरह
कुछ देर बाद समझ में आया
नींद ना आने की वजह
उसकी नाराजगी नहीं
बल्कि तुम्हारी मौजूदगी है
वैसे तुम्हारी मौजूदगी के लिए
तुम्हारा होना जरुरी नहीं होता
तुम हर वक़्त मेरे पास ही होती हो
नहीं तुम तो........
तुम तो जैसे मेरे वजूद का एक हिस्सा हो
या फिर शायद मै तुम्हारे वजूद का हिस्सा हु
खैर .........
उलझ गया था अपने आप से
तय नहीं कर पा रहा था
की तुम्हारे नर्म हाथों पे लगी ताजी मेहंदी की खुशबु मुझे दीवाना बनाती है या
फिर तुम्हारे गेसुओ में लिपटे हुवो फूलों की महक
तुम्हारी हंसी
मेरे पागलपन की वजह है या
तुम्हारी आँखें
एक बात तो जरुर है
कभी तुम
कभी तुम्हारी हंसी
कभी गीली मेहँदी की खुशबु
कभी जुल्फों की महक
कभी तुम्हारी आँखों का जादू
एक एक करके मुझे सताते है
और
रोज मुझे जगाते है
बस अब
मेरी तुमसे एक ही गुजारिश है
एक ब़ार आने की
थोडा वक़्त बिताने की
वादा करता हु
ज्यादा वक़्त नहीं लूँगा
तुम्हारे आगोश में जाते ही
हमेशा के लिए सो जाऊंगा
कल भी पूरी रात मै सो न सका
कोशिश करता रहा
सपने देखने की
पर उसके लिए
नींद का आना भी तो जरुरी है ना
और वो तो जैसे मुझसे नाराज हो गयी थी
बिलकुल तुम्हारी तरह
मेरा उसको मनाने का भी कोई फायदा नहीं हो रहा था
वो भी रूठी हुवी थी
बिलकुल तुम्हारी तरह
कुछ देर बाद समझ में आया
नींद ना आने की वजह
उसकी नाराजगी नहीं
बल्कि तुम्हारी मौजूदगी है
वैसे तुम्हारी मौजूदगी के लिए
तुम्हारा होना जरुरी नहीं होता
तुम हर वक़्त मेरे पास ही होती हो
नहीं तुम तो........
तुम तो जैसे मेरे वजूद का एक हिस्सा हो
या फिर शायद मै तुम्हारे वजूद का हिस्सा हु
खैर .........
उलझ गया था अपने आप से
तय नहीं कर पा रहा था
की तुम्हारे नर्म हाथों पे लगी ताजी मेहंदी की खुशबु मुझे दीवाना बनाती है या
फिर तुम्हारे गेसुओ में लिपटे हुवो फूलों की महक
तुम्हारी हंसी
मेरे पागलपन की वजह है या
तुम्हारी आँखें
एक बात तो जरुर है
कभी तुम
कभी तुम्हारी हंसी
कभी गीली मेहँदी की खुशबु
कभी जुल्फों की महक
कभी तुम्हारी आँखों का जादू
एक एक करके मुझे सताते है
और
रोज मुझे जगाते है
बस अब
मेरी तुमसे एक ही गुजारिश है
एक ब़ार आने की
थोडा वक़्त बिताने की
वादा करता हु
ज्यादा वक़्त नहीं लूँगा
तुम्हारे आगोश में जाते ही
हमेशा के लिए सो जाऊंगा
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