Saturday, June 11, 2011

एक " बारिश " मेरी अपनी.....

मुझे बारिशो में रोना अच्छा लगता है
ये बुँदे उन बूंदों में समां जाती है

और तुम्हे पता भी नहीं चलता है


ना सहा जाता है
और ना ही कहा जाता है
बस अब रहा नहीं जाता है


मेरे सपने मेरे आंसुओ में धुल जाते है
जब भी मै बारिशो में रोता हु
मेरे गम उन बूंदों में घुल जाते है
जब भी मै बारिशो में रोता हु


मुझे बारिशो में रोना अच्छा लगता है
ये बुँदे उन बूंदों में समां जाती है
और तुम्हे पता भी नहीं चलता है


मै कभी बारिशो में रोता हु
और कभी " बारिश " के लिए

जो भी है " बारिश " हर वक़्त मेरे जेहन में होती है
दिल में, दिमाग में और अक्सर

मेरे आंसुओ में


मुझे बारिशो में रोना अच्छा लगता है
ये बुँदे उन बूंदों में समां जाती है

और तुम्हे पता भी नहीं चलता है

उम्मीद है ये बारिश ख़ुशी के आंसू भी लाएगी
इस जिंदगी में ना सही

अगली जिंदगी में तो आएगी


मुझे बारिशो में रोना अच्छा लगता है
ये बुँदे उन बूंदों में समां जाती है

और तुम्हे पता भी नहीं चलता है

Tuesday, May 24, 2011

मै और तुम

जब भी

मै तुझसे

खफा होता हु

तो सोचता हु की

अब

तुझसे

कभी बात नहीं करूँगा

ठान लेता हु

बस

अब बहुत हो चुका

पर

हर बार

हार जाता हु

तुझसे भी

और

अपने आप से भी

पर वो हार भी

तो

कही अन्दर से

मुझे अच्छी लगती है


शायद

मै हर वक़्त

यही

मन्नत मांगता हु

की मै कभी

कभी भी

तुम से

जीत ना पाऊ

और

खुद से

भी

Sunday, May 22, 2011

आग

बस्ती जल रही थी

आग फैली थी

चारो तरफ

सिर्फ

आग

बस

आग

भड़क रही थी

हर तरफ

बस्ती में

पेट में

मन में

आग

दुःख की

गुस्से की

प्रतिशोध की

पर

ना तो वो आग

उनके आंसू सुखा पा रही थी

और

ना ही उनके आंसू

उस आग को बुझा पा रहे थे

Wednesday, May 18, 2011

चाँद

तेरा मेरा हमराज ये चाँद

इस काली स्याह रात में

राह भटकता होगा चाँद

कभी तुम्हे तो कभी मुझे

याद करता होगा चाँद

कभी समंदर की लहरों में

अपने आप को खोजता होगा चाँद

तो कभी चंपा के फूलों के पीछे

आंसू बहाता होगा चाँद


तेरे मेरे जिंदगी के कितना करीब है ये चाँद


वैसे तो मैंने चाँद को

हर रोज तिल तिल टूटते हुवे देखा है

कभी खुदसे तो कभी

दुसरो से रुठते हुवे देखा है


शायद उसकी उम्मीद

उसे फिर ले आती है

कभी उसे

तो कभी मुझे रुलाती है


शायद..... शायद

मेरी उम्मीदों का चाँद भी

कुछ इस कदर ही

बनता बिखरता होगा

कभी खुद रोता तो

कभी मुझे रुलाता होगा

बारिश

जिंदगी भर झुलसता ही रहा

कभी सूरज की अगन से

तो कभी मन की तपन से


चार दिनों के लिए आई थी तुम बारिश बन के


अब वही यादें

आंसू बन कर

मेरी आँखों को भीगा रहे है

Sunday, May 15, 2011

खुदकुशी

खुदकुशी

जिंदगी में कई ब़ार सोचा है की

ख़ुदकुशी कर लू

इस तरह घुट घुट के मरने से तो अच्छा है

एक ही ब़ार में खुद को मुक्त कर लू


पर फिर दिखता है

वो चेहरा जिसने मुझे बांध रखा है

या वो सपने जिन्होंने

ये दिल थाम रखा है


अब भी उम्मीद है

तुमसे मिलने की

जानता हु ये

मृग मरीचिका है

पर कुछ और जीने का

ये बहाना बना रखा है



हर रोज सांसों को बची हुई

रेजगारी की तरह खर्च कर रहा हु

और हर सुबह ऊपर वाले साहूकार से

नया कर्ज मांग रहा हु


जानता हु की ये क़र्ज़ चुका ना पाउँगा

और किसी दिवालिये की तरह

जिंदगी के बाज़ार से उठ जाऊंगा


पर हर रोज जीतने की उम्मीद में नया दाव लगा रहा हु

कभी खुद को तो कभी जिंदगी को आजमां रहा हु



एक गुजारिश है तुझसे

इसके पहले की साहूकार अपना हिसाब मांग ले

मुझसे एक ब़ार मिल जा

ताकि मुझे ख़ुदकुशी से पहले ही

मुक्ति मिल जाये

Monday, May 9, 2011

रिश्ता

मेरा,

जिंदगी और दर्द से अजीब सा रिश्ता है

जिंदगी ने मुझे दर्द दिया

और अब

दर्द मुझसे जिंदगी ले लेगा